साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं होता, बल्कि वह जीवन को देखने का दृष्टिकोण भी प्रदान करता है। कुछ पुस्तकें मनोरंजन करती हैं, कुछ ज्ञान देती हैं, और कुछ ऐसी होती हैं जो पाठकों के भीतर सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा जगाती हैं। वरिष्ठ साहित्यकार राज ऋषि शर्मा की नवीनतम प्रेरक कृति ‘हैप्पीएस्ट (सदा प्रसन्न रहने का मूल मंत्र)’ इसी श्रेणी की एक महत्वपूर्ण पुस्तक है, जिसने अपने सार्थक संदेश, व्यावहारिक दृष्टिकोण और मानवीय मूल्यों पर आधारित चिंतन के कारण अनंता प्रेस साहित्य रत्न पुरस्कार के लिए आधिकारिक रूप से नामांकन प्राप्त किया है।
अनंता प्रेस साहित्य रत्न पुरस्कार उन उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों और रचनाकारों को सम्मानित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है, जिन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज, संस्कृति और मानवीय चेतना को समृद्ध किया है। यह पुरस्कार केवल साहित्यिक उत्कृष्टता का सम्मान नहीं, बल्कि उन विचारों का भी अभिनंदन है जो पाठकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हैं। राज ऋषि शर्मा की यह पुस्तक इन्हीं आदर्शों का सशक्त प्रतिनिधित्व करती है।
‘हैप्पीएस्ट (सदा प्रसन्न रहने का मूल मंत्र)’ एक ऐसी प्रेरक पुस्तक है जो प्रसन्नता को केवल भावनात्मक अनुभव नहीं, बल्कि एक सचेत जीवन-दृष्टि के रूप में प्रस्तुत करती है। लेखक ने वर्षों के अध्ययन, मनोवैज्ञानिक समझ, दार्शनिक दृष्टि और व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर यह स्पष्ट किया है कि वास्तविक प्रसन्नता बाहरी उपलब्धियों या परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि व्यक्ति के विचारों, आत्मबोध और मानसिक संतुलन से उत्पन्न होती है।
पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता इसका सुव्यवस्थित और व्यावहारिक स्वरूप है। इसे चार प्रमुख भागों—प्रसन्नता की यात्रा, आत्म-विकास, संबंध, और प्रसन्नता का रहस्य—में विभाजित किया गया है। प्रत्येक खंड जीवन के ऐसे पक्षों को स्पर्श करता है जो हर व्यक्ति के दैनिक अनुभवों से जुड़े हैं। बच्चे जैसी सरलता बनाए रखना, प्रकृति से जुड़ना, नई चीजें सीखना, यात्रा करना, दूसरों की सहायता करना, आभार व्यक्त करना, क्षमा करना, सकारात्मक सोच विकसित करना, स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, मजबूत संबंध बनाना, वर्तमान में जीना और स्वयं को स्वीकार करना जैसे विषय इस पुस्तक को केवल प्रेरणादायक नहीं, बल्कि व्यवहारिक मार्गदर्शिका भी बनाते हैं।
पुस्तक का एक अत्यंत प्रभावशाली पक्ष यह है कि लेखक ने अपने विचारों को केवल सिद्धांतों तक सीमित नहीं रखा। महात्मा गांधी, मदर टेरेसा, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, थॉमस एडिसन, नेल्सन मंडेला, हेलेन केलर, मलाला और अन्य महान व्यक्तित्वों के जीवन-प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने यह दर्शाया है कि कठिनाइयों और असफलताओं के बीच भी प्रसन्नता, धैर्य और उद्देश्यपूर्ण जीवन संभव है। इससे पुस्तक की विश्वसनीयता और प्रेरक प्रभाव दोनों सुदृढ़ होते हैं।
अनंता प्रेस साहित्य रत्न पुरस्कार चयन समिति ने इस पुस्तक को विशेष रूप से इसलिए नामांकित किया है क्योंकि यह आत्म-विकास और मानसिक स्वास्थ्य जैसे समकालीन विषयों को भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। पुस्तक बौद्ध दर्शन के मध्यम मार्ग, आत्म-साक्षात्कार, ध्यान, आत्मनिरीक्षण और आत्म-सुझाव जैसी अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाते हुए पाठकों को व्यावहारिक जीवन में संतुलन और आंतरिक शांति की दिशा प्रदान करती है। आज के तनावपूर्ण और तीव्र गति वाले जीवन में यह दृष्टिकोण अत्यंत प्रासंगिक और आवश्यक प्रतीत होता है।
राज ऋषि शर्मा का साहित्यिक व्यक्तित्व स्वयं इस नामांकन को और अधिक सार्थक बनाता है। हिंदी, डोगरी और अंग्रेज़ी भाषाओं में समान दक्षता रखने वाले इस बहुमुखी रचनाकार ने अब तक विभिन्न विधाओं में छत्तीस से अधिक पुस्तकों की रचना की है। कविता, उपन्यास, निबंध, आलोचना, प्रेरक साहित्य और पत्रकारिता जैसे विविध क्षेत्रों में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उनकी अनेक रचनाएँ प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं तथा आकाशवाणी से प्रसारित भी हुई हैं। युवा लेखकों के मार्गदर्शन, साहित्यिक कार्यशालाओं के आयोजन और साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादन के माध्यम से उन्होंने साहित्यिक समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उनकी लेखनी की सबसे बड़ी शक्ति उसकी सहजता, संवेदनशीलता और विचारों की गहराई है। वे जटिल मनोवैज्ञानिक एवं दार्शनिक विषयों को सरल, प्रवाहपूर्ण और प्रेरक शैली में प्रस्तुत करते हैं, जिससे उनकी रचनाएँ व्यापक पाठक वर्ग तक सहजता से पहुँचती हैं। ‘हैप्पीएस्ट’ इसी परंपरा का उत्कृष्ट विस्तार है, जहाँ ज्ञान और व्यवहारिक जीवन-दृष्टि का संतुलित समन्वय दिखाई देता है।
अनंता प्रेस साहित्य रत्न पुरस्कार के लिए इस पुस्तक का चयन केवल इसकी लोकप्रियता या प्रेरक विषयवस्तु के कारण नहीं, बल्कि इसलिए भी किया गया है क्योंकि यह पाठकों को स्वयं के भीतर झाँकने, अपनी क्षमताओं को पहचानने, मानसिक संतुलन विकसित करने और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करती है। यह पुस्तक साहित्य को सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ जोड़ते हुए यह सिद्ध करती है कि उत्कृष्ट लेखन व्यक्ति के विचारों, व्यवहार और जीवन की दिशा को बदलने की क्षमता रखता है।
अनंता प्रेस परिवार की ओर से राज ऋषि शर्मा को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई। हमें विश्वास है कि ‘हैप्पीएस्ट (सदा प्रसन्न रहने का मूल मंत्र)’ आने वाले वर्षों में भी असंख्य पाठकों को आत्मविश्वास, मानसिक संतुलन और आंतरिक प्रसन्नता की ओर प्रेरित करती रहेगी। आपकी साहित्य-साधना, मानवीय मूल्यों के प्रति आपकी प्रतिबद्धता और समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला आपका लेखन हिंदी साहित्य को निरंतर समृद्ध करता रहे—इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ हम आपके उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की कामना करते हैं।
एक बार पुनः, अनंता प्रेस साहित्य रत्न पुरस्कार हेतु आपके आधिकारिक नामांकन पर हार्दिक बधाई।



